फ़तेहपुर शहर के आवास विकास इलाक़े के एक बड़े स्टाकिस्ट के गो-डाउन में पर्याप्त भण्डारण के बावजूद लाँकडाउन के दूसरे दिन ही आटे की क़ीमत पाँच-छः सौ रुपये प्रति कुन्तल तक बढ़ा देना कही से मानवीय दृष्टिकोण नहीं कहा जा सकता। इसी तरह ज़रूरत के अन्य समानो की दरो में भी अप्रत्याशित उछाल सीधे तौर पर अभी से लोगों की समस्याओं को बढ़ाने वाली साबित हो रही है। मुख्यालय समेत जनपद के अन्य हिस्सों से ज़रूरी सामान चाहे खाद्यान्न हो, दवाए हों उन्हें महँगी क़ीमतों में देने, कालाबाज़ारी, घटतौली आदि की शिकायतें आम हो गई है।
फ़तेहपुर शहर के आवास विकास इलाक़े के एक बड़े स्टाकिस्ट के गो-डाउन में पर्याप्त भण्डारण के बावजूद लाँकडाउन के दूसरे दिन ही आटे की क़ीमत पाँच-छः सौ रुपये प्रति कुन्तल तक बढ़ा देना कही से मानवीय दृष्टिकोण नहीं कहा जा सकता। इसी तरह ज़रूरत के अन्य समानो की दरो में भी अप्रत्याशित उछाल सीधे तौर पर अभी से लोगों की समस्याओं को बढ़ाने वाली साबित हो रही है। मुख्यालय समेत जनपद के अन्य हिस्सों से ज़रूरी सामान चाहे खाद्यान्न हो, दवाए हों उन्हें महँगी क़ीमतों में देने, कालाबाज़ारी, घटतौली आदि की शिकायतें आम हो गई है।